الجمعة 26 شباط/فبراير 2021

رويبضات الأقلام

الأربعاء 20 كانون ثاني/يناير 2021
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رويبضات الأقلام
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‌الأقلام‌ ‌الرُوَيْبِضَة‌!!‌ ‌
الرُوَيْبِضَة:‌ ‌الرجل‌ ‌التافه‌ ‌
تافه:‌ ‌ركيك‌ ‌,‌ ‌لا‌ ‌قيمة‌ ‌له‌ ‌,‌ ‌غير‌ ‌متزن‌ ‌,‌ ‌قليل‌ ‌العقل‌ ‌,‌ ‌حقير‌.‌ ‌
والمقصود‌ ‌من‌ ‌العنوان‌ ‌الأقلام‌ ‌التافهة‌.‌ ‌
للكراسي‌ ‌بأنواعها‌ ‌أقلام‌ ‌مسعورة‌ ‌متأهبة‌ ‌للدفاع‌ ‌عنها‌ ‌بشراسة‌ ‌وتبرير‌ ‌مآثمها‌ ‌وخطاياها‌ ‌,‌ ‌وألسنتها‌ ‌تلعلع‌ ‌في‌ ‌
وسائل‌ ‌الإعلام‌ ‌,‌ ‌وما‌ ‌تكتبه‌ ‌بهتان‌ ‌وهذيان‌ ‌وتسويغات‌ ‌ظالمة‌ ‌لسلوكيات‌ ‌عدوانية‌ ‌على‌ ‌الإنسانية‌.‌ ‌
فشوّهت‌ ‌الواقع‌ ‌وأضعفت‌ ‌إرادة‌ ‌الحقيقة‌ ‌وطمست‌ ‌الحق‌ ‌,‌ ‌وعززت‌ ‌الفساد‌ ‌والظلم‌ ‌والقهر‌ ‌والإستهتار‌ ‌
بالقوة‌ ‌والسلطة‌ ‌,‌ ‌وأسهمت‌ ‌بتبديد‌ ‌ثروات‌ ‌البلاد‌ ‌وبهذلة‌ ‌العباد‌.‌ ‌
أقلام‌ ‌تؤازر‌ ‌الظلمة‌ ‌والفاسدين‌ ‌والعابثين‌ ‌بمصائر‌ ‌المواطنين‌ ‌,‌ ‌والسارقين‌ ‌للقمة‌ ‌عيشهم‌ ‌والمصادرين‌ ‌
لمستقبلهم‌ ‌,‌ ‌ولا‌ ‌تستحي‌ ‌مما‌ ‌تدعو‌ ‌إليه‌ ‌من‌ ‌سلوكيات‌ ‌منافية‌ ‌لأبسط‌ ‌القيم‌ ‌والأخلاق‌ ‌,‌ ‌لكنها‌ ‌تكتب‌ ‌
بتفويض‌ ‌من‌ ‌الذين‌ ‌يستجدون‌ ‌من‌ ‌الكراسي‌ ‌ويتعبّدون‌ ‌في‌ ‌ظلالها‌ ‌,‌ ‌ويطلقون‌ ‌الفتاوى‌ ‌المنحازة‌ ‌للشر‌ ‌وفعل‌ ‌
السوء‌.‌ ‌
فكل‌ ‌جريمة‌ ‌يسبقها‌ ‌ما‌ ‌يحللها‌ ‌ويحث‌ ‌عليها‌ ‌,‌ ‌ويحسبها‌ ‌من‌ ‌طقوس‌ ‌الإيمان‌ ‌وإستقامة‌ ‌الدين‌.‌ ‌
ووفقا‌ ‌لهذه‌ ‌المعطيات‌ ‌المنافية‌ ‌للقوة‌ ‌والإقتدار‌ ‌والتفاعل‌ ‌الإنساني‌ ‌المعاصر‌ ‌السليم‌ ‌,‌ ‌تدهورت‌ ‌أحوال‌ ‌
المجتمعات‌ ‌وضاعت‌ ‌الحقوق‌ ‌والواجبات‌ ‌,‌ ‌وفقدت‌ ‌المعايير‌ ‌مواصفاتها‌ ‌ودورها‌ ‌وقيمتها‌ ‌الحقيقية‌ ‌,‌ ‌
وتسامق‌ ‌التافهون‌ ‌وتسيّدوا‌ ‌على‌ ‌المجتمع‌ ‌فأوردوه‌ ‌الذل‌ ‌والهوان‌ ‌,‌ ‌وأهانوه‌ ‌بالتبعية‌ ‌والخنوع‌ ‌والإستعباد‌ ‌
لإرادة‌ ‌الآخرين‌.‌ ‌
وصارت‌ ‌الرويبضات‌ ‌تقود‌ ‌,‌ ‌وهذا‌ ‌حال‌ ‌مجتمعات‌ ‌,‌ ‌ينطبق‌ ‌عليها‌ ‌القول‌ ‌:”وأن‌ ‌تنطق‌ ‌الرويبصة‌ ‌في‌ ‌أمر‌ ‌
العامة”‌ ‌,‌ ‌فتلك‌ ‌هي‌ ‌الطامة‌ ‌التي‌ ‌ما‌ ‌بعدها‌ ‌طامة‌!!‌ ‌
فهل‌ ‌من‌ ‌قدرة‌ ‌على‌ ‌قمع‌ ‌جماح‌ ‌رويبضات‌ ‌ويلاتنا؟‌!!‌ ‌




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